Vrat
सर्वपितृ अमावस्या 2026: संपूर्ण श्राद्ध विधि, तर्पण मुहूर्त, महात्म्य एवं पितृ दोष निवारण उपाय
लेखक: आचार्य अथर्व शुक्ला | तिथि: August 23, 2026 | पढ़ने का समय: 15 मिनट पठन
हिंदू धर्म में पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) का विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है। भाद्रपद मास की पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन मास की अमावस्या तक चलने वाले इन 16 दिनों में हम अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं।
पितृ पक्ष का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन सर्वपितृ अमावस्या (10 अक्टूबर 2026) कहलाता है, जिसे महालया अमावस्या भी कहा जाता है।
सर्वपितृ अमावस्या 2026: शुभ मुहूर्त
- अमावस्या तिथि प्रारंभ: 10 अक्टूबर 2026, प्रातः 03:22 बजे
- अमावस्या तिथि समापन: 11 अक्टूबर 2026, प्रातः 01:12 बजे
- कुतूप मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ समय): सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:38 बजे तक
- अपराह्न काल: दोपहर 01:28 बजे से शाम 03:58 बजे तक
श्राद्ध और तर्पण की संपूर्ण विधि (Step-by-Step Vidhi):
- स्नान और संकल्प: प्रातः काल स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों का ध्यान करें।
- तर्पण विधि: तांबे के पात्र में जल, दूध, काले तिल और सफेद फूल लेकर पितरों को जल अर्पित करें (ॐ पितृभ्यो नमः)।
- पंचबली भोग: भोजन बनाने के बाद गाय, कुत्ते, कौए, देवताओं और चींटियों के लिए अलग-अलग भाग निकालें।
- ब्राह्मण भोजन: सुयोग्य ब्राह्मण को भोजन कराएं और सामर्थ्य अनुसार दान-दक्षिणा दें।
पितृ दोष शांति के उपाय:
- पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
- इस दिन जरूरतमंदों को अन्न और वस्त्र का दान अवश्य करें।
- कुंडली में गंभीर पितृ दोष होने पर विशेष शांति पूजन कराएं।