पितृ पक्ष 2026: श्राद्ध तिथियां, तर्पण विधि और संपूर्ण जानकारी
लेखक: आचार्य अथर्व शुक्ला | तिथि: August 19, 2026 | पढ़ने का समय: 12 मिनट पठन
सनातन धर्म में पितृ पक्ष का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। यह वह पवित्र समय है जब हम अपने दिवंगत माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी तथा अन्य पूर्वजों का स्मरण करके उनके निमित्त श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान, अन्नदान और ब्राह्मण भोजन आदि करते हैं। 'श्राद्ध' शब्द श्रद्धा से बना है। अर्थात् अपने पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता के साथ किया गया कर्म।
वर्ष 2026 में पितृ पक्ष 27 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक रहेगा। इसके साथ 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध का भी विशेष महत्व रहेगा। इस वर्ष तिथियों के क्षय/वृद्धि के कारण चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध एक ही दिन, 30 सितंबर 2026 को पड़ रहे हैं। इसलिए केवल क्रम से तारीख गिनकर श्राद्ध करना उचित नहीं है।
पितृ पक्ष 2026 प्रारंभ: 27 सितंबर 2026, रविवार। पितृ पक्ष समाप्त: 10 अक्टूबर 2026, शनिवार। सर्वपितृ अमावस्या: 10 अक्टूबर 2026, शनिवार। पूर्णिमा श्राद्ध: 26 सितंबर 2026, शनिवार। पूर्णिमा श्राद्ध को पितृ पक्ष के मुख्य कृष्ण पक्ष से अलग माना जाता है, लेकिन श्राद्ध कैलेंडर में इसे विशेष रूप से शामिल किया जाता है।
2026 के पंचांग में चतुर्थी और पंचमी दोनों श्राद्ध 30 सितंबर को आने के कारण 16 श्राद्ध 15 कैलेंडर तिथियों में संपन्न होंगे। श्राद्ध कर्म के लिए सामान्य रूप से कुतुप मुहूर्त, रौहिण मुहूर्त तथा अपराह्न काल को प्रमुख माना जाता है।
पितृ तर्पण क्या है? पितरों के निमित्त श्रद्धापूर्वक जल अर्पित करने की प्रक्रिया को पितृ तर्पण कहा जाता है। सामान्य तर्पण में जल, काले तिल और कुश का प्रयोग किया जाता है। प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और अपने गोत्र एवं पितरों का संकल्प करके तर्पण करें।