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नवरात्रि : आदिशक्ति की उपासना का महापर्व एवं गुप्त नवरात्रि (जुलाई 2026)

लेखक: Acharya Atharv Shukla | तिथि: July 03, 2026 | पढ़ने का समय: 12 min read

सनातन धर्म में नवरात्रि केवल एक उत्सव नहीं, अपितु आदिशक्ति भगवती की आराधना, आत्मशुद्धि एवं आध्यात्मिक उन्नति का महान अवसर है। 'नवरात्रि' शब्द का अर्थ है – नौ रात्रियाँ। इन नौ दिनों एवं रात्रियों में माँ दुर्गा के नव स्वरूपों की उपासना की जाती है।

शास्त्रों में भगवती को समस्त सृष्टि की मूल शक्ति कहा गया है – 'या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥' अर्थात् जो देवी समस्त प्राणियों में शक्ति स्वरूप से स्थित हैं, उन भगवती को बार-बार नमस्कार है।

नवरात्रि का वर्णन अनेक पुराणों एवं तांत्रिक ग्रंथों में प्राप्त होता है। विशेष रूप से देवी भागवत पुराण, मार्कण्डेय पुराण तथा विभिन्न तंत्र ग्रंथों में नवरात्रि साधना का विस्तृत विधान बताया गया है। देवी महात्म्य में कहा गया है – 'सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥' माँ भगवती समस्त मंगलों की अधिष्ठात्री तथा भक्तों की अभिलाषाओं को पूर्ण करने वाली हैं।

नवरात्रि के नौ दिनों में माँ के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है: माँ शैलपुत्री, माँ ब्रह्मचारिणी, माँ चन्द्रघण्टा, माँ कूष्माण्डा, माँ स्कन्दमाता, माँ कात्यायनी, माँ कालरात्रि, माँ महागौरी और माँ सिद्धिदात्री। इन नौ स्वरूपों की आराधना से साधक को धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है।

कलश को समस्त देवशक्तियों का निवास स्थान माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है— 'कलशस्य मुखे विष्णुः कण्ठे रुद्रः समाश्रितः। मूले तस्य स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणाः स्मृताः॥' अर्थात् कलश के मुख में भगवान विष्णु, कण्ठ में रुद्र तथा मूल में ब्रह्मा का निवास माना गया है। इसी कारण नवरात्रि के प्रथम दिन विधिपूर्वक घटस्थापना की जाती है।

वर्ष में चार नवरात्रियाँ आती हैं। इनमें चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि सर्वसामान्य रूप से प्रसिद्ध हैं, जबकि माघ एवं आषाढ़ मास की नवरात्रियों को 'गुप्त नवरात्रि' कहा जाता है। गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से तांत्रिक साधना, दशमहाविद्या उपासना, मंत्र सिद्धि, यंत्र पूजन तथा गोपनीय आध्यात्मिक साधनाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

वर्ष 2026 में आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई से 23 जुलाई तक मनाई जाएगी। इस दौरान साधक को विधिपूर्वक घटस्थापना, दुर्गा सप्तशती पाठ और नवर्ण मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥' का जप करना चाहिए।

गुप्त नवरात्रि को माँ काली, तारा, त्रिपुरसुन्दरी, भुवनेश्वरी, बगलामुखी, मातंगी और कमला जैसी दशमहाविद्याओं की साधना के लिए विशेष फलदायी माना गया है। इन साधनाओं को सदैव योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए।

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