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नाग पंचमी 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, कथा, महत्व एवं कालसर्प दोष उपाय

लेखक: आचार्य अथर्व शुक्ल | तिथि: August 15, 2026 | पढ़ने का समय: 10 min read

सनातन धर्म में नाग पंचमी का पर्व भगवान नाग देवता की पूजा एवं आराधना का विशेष दिन माना जाता है। यह पर्व प्रकृति, जीव-जंतुओं और आध्यात्मिक ऊर्जा के प्रति सम्मान का प्रतीक है। हिन्दू धर्म में नागों को भगवान शिव के आभूषण, भगवान विष्णु की शेषशय्या और दिव्य शक्ति के प्रतीक के रूप में पूजने की प्राचीन परंपरा है। नाग पंचमी के दिन भगवान शिव, नाग देवता एवं अनंत नाग की पूजा करने से कालसर्प दोष, राहु-केतु संबंधी अशुभ प्रभाव तथा जीवन की अनेक बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

नाग पंचमी 2026 कब है? वर्ष 2026 में नाग पंचमी 15 अगस्त 2026, शनिवार को मनाई जाएगी (तिथि: श्रावण मास शुक्ल पक्ष पंचमी)। नाग पंचमी का व्रत और पूजा श्रावण मास में होने के कारण विशेष फलदायी मानी जाती है, क्योंकि यह महीना भगवान शिव एवं नाग देवताओं को अत्यंत प्रिय है। अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त अवश्य देखें।

नाग पंचमी का धार्मिक महत्व: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार नाग देवता भगवान शिव के अत्यंत प्रिय हैं। भगवान शिव के गले में विराजमान वासुकि नाग उनकी शक्ति और नियंत्रण का प्रतीक है। नाग पंचमी के दिन पूजा करने से: (1) भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त होती है, (2) परिवार की विषैले जीवों व भय से रक्षा होती है, (3) राहु और केतु के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं, (4) कालसर्प दोष की शांति हेतु यह दिन सर्वोत्तम माना जाता है।

नाग पंचमी पूजा विधि एवं सामग्री: प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें और नाग देवता की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। नाग देवता को दूध, जल, पुष्प, अक्षत, चंदन, धूप-दीप तथा कुशा अर्पित करें। भगवान शिव को बेलपत्र एवं जल चढ़ाएँ। नाग पंचमी व्रत कथा का पाठ करें, 'ॐ नागदेवताभ्यो नमः' एवं 'ॐ नमः शिवाय' मंत्रों का जप करें और आरती करके सुख-शांति की प्रार्थना करें।

नाग पंचमी व्रत कथा: पौराणिक कथा के अनुसार एक किसान के हल से अज्ञानता में नागिन के बच्चों की मृत्यु हो गई। नागिन ने क्रोधित होकर किसान के परिवार को डंसने का विचार किया, परंतु किसान की धर्मनिष्ठ पुत्री ने श्रद्धापूर्वक नाग देवता की पूजा की, दूध अर्पित कर क्षमा मांगी। नाग देवता अत्यंत प्रसन्न हुए और किसान के पूरे परिवार को जीवनदान व सुरक्षा का आशीर्वाद दिया। तभी से नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा व क्षमा प्रार्थना की परंपरा चली आ रही है।

नाग पंचमी पर विशेष ज्योतिषीय उपाय (Om Jyotish Sansthan): (1) कालसर्प दोष शांति के लिए: नाग पंचमी पर भगवान शिव का दूध व जल से रुद्राभिषेक करें तथा 'ॐ नमः शिवाय' अथवा महामृत्युंजय मंत्र का जप करें। (2) राहु-केतु दोष निवारण हेतु: नाग देवता की पूजा करें, शिवलिंग पर जल चढ़ाएँ और काले तिल तथा कुशा का दान करें। (3) भय व मानसिक तनाव से मुक्ति हेतु: शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर तांबे या चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा अर्पित करें। (4) संतान सुख हेतु: शिव परिवार का पूजन कर जरूरतमंद बच्चों को फल व दूध का दान दें।

मंत्र एवं क्या करें/क्या न करें: मुख्य मंत्र - 'ॐ नागदेवताभ्यो नमः' तथा 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥' नाग पंचमी पर जीवित नागों को बिल्कुल परेशान न करें, प्रकृति को नुकसान न पहुँचाएँ और सात्विक आहार लें। शिव मंदिर जाकर जल व बेलपत्र अर्पित करें और दान-पुण्य करें।

निष्कर्ष: नाग पंचमी केवल एक धार्मिक पर्व ही नहीं, अपितु यह प्रकृति, पर्यावरण एवं दिव्य शक्तियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पावन अवसर है। यदि आप अपनी जन्मकुंडली, कालसर्प दोष, राहु-केतु प्रभाव, रुद्राभिषेक या ज्योतिषीय परामर्श प्राप्त करना चाहते हैं, तो Om Jyotish Sansthan के संस्थापक आचार्य अथर्व शुक्ल से संपर्क कर सकते हैं।

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