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श्री कृष्ण जन्माष्टमी 2026: कब है जन्माष्टमी? जानें शुभ मुहूर्त, निशीथ काल, व्रत, पूजा विधि और पारण का समय

लेखक: आचार्य अथर्व शुक्ला | तिथि: August 28, 2026 | पढ़ने का समय: 12 मिनट पठन

श्री कृष्ण जन्माष्टमी 2026 का पावन पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाएगा। सनातन धर्म में जन्माष्टमी का विशेष महत्व है। इस दिन भक्त भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं और रात्रि में निशीथ काल के समय भगवान के प्राकट्य का उत्सव मनाते हैं।

वर्ष 2026 में श्री कृष्ण जन्माष्टमी शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। दिल्ली के स्थानीय पंचांग के अनुसार जन्माष्टमी की मध्यरात्रि पूजा का विशेष समय 4 सितंबर की रात्रि से 5 सितंबर की मध्यरात्रि तक रहेगा।

🦚 जन्माष्टमी 2026 कब है?

श्री कृष्ण जन्माष्टमी — 4 सितंबर 2026, शुक्रवार। यह पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा में देवकी और वासुदेव के यहां हुआ था। धार्मिक परंपरा में उनके जन्म का समय मध्यरात्रि माना गया है, इसलिए जन्माष्टमी की पूजा में निशीथ काल का विशेष महत्व है।

🕉️ जन्माष्टमी 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त (दिल्ली पंचांग):

  • जन्माष्टमी: शुक्रवार, 4 सितंबर 2026
  • निशीथ पूजा का समय: रात 11:16 PM से 12:03 AM
  • निशीथ काल की अवधि: लगभग 47 मिनट
  • मध्यरात्रि का क्षण: लगभग 11:39 PM
  • अष्टमी तिथि समाप्त: 5 सितंबर 2026 को लगभग 12:13 AM
  • रोहिणी नक्षत्र: 4 सितंबर को रात्रि तक प्रभावी रहेगा।

(नोट: मुहूर्त स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है। इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार अंतिम समय अवश्य देखें।)

🌙 निशीथ काल में ही क्यों होती है श्रीकृष्ण पूजा?

श्रीकृष्ण का प्राकट्य रात्रि के मध्य में हुआ माना जाता है। इसी कारण जन्माष्टमी पर निशीथ काल में भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा, अभिषेक और जन्मोत्सव किया जाता है। इस समय भगवान के बाल स्वरूप का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शर्करा) से अभिषेक करके उन्हें नए वस्त्र एवं आभूषण पहनाए जाते हैं तथा माखन-मिश्री सहित विभिन्न नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं।

🙏 जन्माष्टमी व्रत कैसे रखें?

  1. प्रातः स्नान करके भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करें।
  2. व्रत का संकल्प लें।
  3. दिनभर भगवान श्रीकृष्ण के नाम, मंत्र और कथा का श्रवण करें।
  4. फलाहार या निराहार व्रत अपनी क्षमता के अनुसार रखें।
  5. रात्रि में निशीथ काल में भगवान श्रीकृष्ण का पूजन करें।
  6. भगवान के जन्म के समय शंख, घंटी और जयकारों के साथ जन्मोत्सव मनाएं।
  7. पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करें और परंपरा के अनुसार व्रत का पारण करें।

(नोट: जो लोग स्वास्थ्य कारणों से निर्जल या निराहार व्रत नहीं रख सकते, उन्हें अपनी शारीरिक स्थिति के अनुसार ही व्रत करना चाहिए।)

🪷 श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि:

  1. पूजा स्थान की तैयारी: पूजा स्थान को स्वच्छ करके वहां चौकी पर पीला या लाल वस्त्र बिछाएं।
  2. भगवान श्रीकृष्ण की स्थापना: लड्डू गोपाल या श्रीकृष्ण की प्रतिमा को सुंदर वस्त्र और आभूषण से सजाएं।
  3. पंचामृत अभिषेक: निशीथ काल में भगवान का पंचामृत से अभिषेक करें।
  4. वस्त्र और श्रृंगार: अभिषेक के बाद भगवान को स्वच्छ वस्त्र पहनाएं और चंदन, पुष्प तथा तुलसी अर्पित करें।
  5. नैवेद्य: भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, फल, मिठाई और अन्य सात्त्विक भोग अर्पित करें।
  6. मंत्र एवं आरती: 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप करके आरती करें। इसके बाद श्रीकृष्ण जन्म की कथा या श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध का पाठ/श्रवण करें।

🌸 जन्माष्टमी पर तुलसी का महत्व:

भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व माना गया है। भगवान श्रीकृष्ण को भोग अर्पित करते समय तुलसी दल अर्पित करने की परंपरा है। तुलसी दल सदैव श्रद्धा और शुद्ध भाव से अर्पित करें।

🦚 जन्माष्टमी का धार्मिक महत्व:

श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध में भगवान श्रीकृष्ण के अवतार और बाल लीलाओं का विस्तृत वर्णन मिलता है। जन्माष्टमी केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि धर्म, भक्ति, प्रेम और भगवान के प्रति समर्पण का पर्व है।

🌿 जन्माष्टमी पर क्या करें?

  • भगवान श्रीकृष्ण का नाम जप और श्रीमद्भागवत/भगवद्गीता का पाठ करें।
  • जरूरतमंद लोगों को भोजन या वस्त्र दान करें।
  • मंदिर में दर्शन एवं पूजा करें और घर में भजन-कीर्तन के साथ जन्मोत्सव मनाएं।

🌙 जन्माष्टमी 2026 पारण का समय:

दिल्ली पंचांग में 5 सितंबर 2026 को सूर्योदय के बाद पारण का समय लगभग 5:31 AM के बाद दिया गया है। अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार पारण करें।

📿 श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मंत्र:

'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।'

'हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥'

🏹 मथुरा-वृंदावन में जन्माष्टमी:

मथुरा और वृंदावन में 4 सितंबर 2026 को जन्माष्टमी और 5 सितंबर को भव्य नंदोत्सव आयोजित किया जाएगा।

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