एकादशी महात्म्य: क्यों कहा गया है एकादशी को समस्त व्रतों में श्रेष्ठ?
लेखक: Acharya Atharv Shukla | तिथि: June 28, 2026 | पढ़ने का समय: 10 min read
सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व बताया गया है। प्रत्येक मास में दो एकादशी आती हैं – कृष्ण पक्ष एवं शुक्ल पक्ष की। शास्त्रों में इसे पापों का नाश करने वाली, मन को शुद्ध करने वाली तथा भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त कराने वाली तिथि कहा गया है।
एकादशी की उत्पत्ति: पद्म पुराण के अनुसार भगवान विष्णु के शरीर से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई, जिसने मुर नामक असुर का वध किया। उस दिव्य शक्ति का नाम "एकादशी" रखा गया। प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने वरदान दिया कि जो व्यक्ति एकादशी व्रत करेगा, उसके पाप नष्ट होंगे और उसे उत्तम गति प्राप्त होगी।
शास्त्रीय प्रमाण: पद्म पुराण के अनुसार - "न गायत्र्याः परं मन्त्रं न मातुः परदैवतम्। न काश्याः परं तीर्थं नैकादश्याः समं व्रतम्॥" अर्थात् गायत्री से बढ़कर कोई मंत्र नहीं, माता से बढ़कर कोई देवता नहीं, काशी से बढ़कर कोई तीर्थ नहीं और एकादशी से बढ़कर कोई व्रत नहीं।
स्कन्द पुराण में कहा गया है कि जो फल अनेक यज्ञ, दान और तीर्थयात्रा से प्राप्त होता है, वही फल श्रद्धापूर्वक की गई एकादशी से प्राप्त हो सकता है। श्रीमद्भागवत महापुराण में भगवान विष्णु की भक्ति को कलियुग में सर्वोत्तम साधन बताया गया है। एकादशी भगवान की विशेष प्रिय तिथि मानी गई है, इसलिए इस दिन उपवास, जप और भजन का विशेष महत्व है।
एकादशी व्रत के लाभ: मन एवं इन्द्रियों पर नियंत्रण बढ़ता है। भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। पाप कर्मों का क्षय होता है। आध्यात्मिक उन्नति होती है। मृत्यु के पश्चात शुभ गति प्राप्त होने का वर्णन मिलता है।
निष्कर्ष: शास्त्रों में एकादशी को केवल उपवास का दिन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, भगवान विष्णु की भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर बताया गया है। जो व्यक्ति श्रद्धा, नियम और भक्ति के साथ एकादशी व्रत करता है, वह सांसारिक एवं आध्यात्मिक दोनों प्रकार के कल्याण का अधिकारी बनता है।