विजयादशमी (दशहरा) 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व
लेखक: आचार्य अथर्व शुक्ला | तिथि: October 10, 2026 | पढ़ने का समय: 14 मिनट पठन
सनातन धर्म में विजयादशमी (दशहरा) का पावन पर्व सत्य, धर्म और दिव्य चेतना की विजय का शाश्वत प्रतीक है। यह महापर्व केवल एक ऐतिहासिक अथवा पौराणिक घटना का स्मरण नहीं, बल्कि प्रत्येक मनुष्य के भीतर स्थित अज्ञान, अहंकार, विकार और तामसिक प्रवृत्तियों पर आत्मिक प्रकाश एवं सात्विकता की विजय का उत्सव है।
शास्त्रों एवं पुराणों में वर्णित है कि आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का संहार कर धर्म की पुनः स्थापना की थी। इसी पावन तिथि पर माँ भगवती दुर्गा ने महिषासुर का वध कर देवताओं एवं समस्त लोकों को अभय प्रदान किया था। इसलिए इस पावन दिन को 'विजयादशमी' एवं 'दशहरा' के नाम से श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है।
ज्योतिषीय एवं तांत्रिक दृष्टिकोण से विजयादशमी का दिन 'अबूझ मुहूर्त' (सर्वसिद्धिदायक स्वयंसिद्ध मुहूर्त) माना गया है। इस दिन प्रारंभ किया गया कोई भी शुभ कार्य, नवीन प्रतिष्ठान का उद्घाटन, विद्यारंभ, वाहन क्रय, गृह प्रवेश अथवा मंत्र दीक्षा अनंत गुना शुभ फल प्रदान करती है।
│ विजयादशमी 2026
│ तिथि: आश्विन शुक्ल दशमी
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विजयादशमी 2026 कब है? (दिनांक व वार विवरण)
वैदिक पंचांग की सूक्ष्म गणना के अनुसार वर्ष 2026 में विजयादशमी का महापर्व 20 अक्टूबर 2026, दिन मंगलवार को पूरे देश में अत्यंत हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा।
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि का प्रारंभ 19 अक्टूबर की सायं से होकर 20 अक्टूबर की दोपहर उपरांत तक रहेगा। सनातन धर्म में उदयातिथि एवं विजय मुहूर्त का विशेष महत्व होने के कारण 20 अक्टूबर को ही विजयादशमी के समस्त अनुष्ठान, शमी पूजन एवं अपराजिता पूजा संपन्न किए जाएंगे।
विजयादशमी 2026 की तिथि और पंचांग विवरण
धार्मिक अनुष्ठानों की प्रामाणिकता हेतु पंचांग के मुख्य अंगों का सूक्ष्म ज्ञान आवश्यक है:
| विवरण | शास्त्रीय जानकारी |
|---|---|
| मुख्य पर्व | विजयादशमी (दशहरा) 2026 |
| ग्रेगोरियन दिनांक | 20 अक्टूबर 2026 |
| वार (Day) | मंगलवार (Tuesday) |
| हिन्दू मास | आश्विन मास |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
| तिथि | दशमी तिथि |
| नक्षत्र | श्रवण नक्षत्र |
| सूर्योदय समय | प्रातः 06:25 बजे |
| सूर्यास्त समय | सायं 05:48 बजे |
| विक्रम संवत | 2083 (कालयुक्त) |
| शक संवत | 1948 |
विजयादशमी 2026 का शुभ मुहूर्त (दिल्ली एवं भारत)
विजयादशमी के दिन 'विजय मुहूर्त' और 'अपराह्न काल' में पूजन करने का विशेष विधान है:
| मुहूर्त / अनुष्ठान | शुभ समय एवं अवधि |
|---|---|
| विजय मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ) | अपराह्न 01:58 से 02:44 बजे तक |
| अपराह्न पूजा मुहूर्त | दोपहर 01:13 से 03:28 बजे तक |
| अभिजित मुहूर्त | दोपहर 11:43 से 12:29 बजे तक |
| अमृत काल मुहूर्त | प्रातः 08:35 से 10:05 बजे तक |
| राहुकाल (अशुभ - पूजन वर्जित) | अपराह्न 03:00 से 04:30 बजे तक |
विशेष सूचना: सूर्योदय और स्थानीय देशांतर के अनुसार विभिन्न शहरों में समय 5 से 15 मिनट आगे-पीछे हो सकता है। कृपया अपने स्थानीय सूर्योदय के अनुसार पूजा का संकल्प लें।
विजयादशमी पर शमी पूजन एवं अपराजिता पूजा का महत्व
विजयादशमी के दिन शमी वृक्ष (खेजड़ी) का पूजन और माँ अपराजिता की आराधना का विशेष विधान है। महाभारत काल में पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान अपने समस्त दिव्यास्त्र शमी वृक्ष के कोटर में ही छिपाकर रखे थे और अज्ञातवास पूर्ण होने पर विजयादशमी के दिन पुनः प्राप्त कर विजयश्री का आशीर्वाद प्राप्त किया था।
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन शमी के पत्तों (जिन्हें स्वर्ण पत्र कहा जाता है) का परस्पर आदान-प्रदान करने और वरिष्ठजनों का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेने से घर में धन-धान्य, वैभव और आरोग्य की वृद्धि होती है।
आवश्यक पूजा सामग्री चेकलिस्ट
पूजन आरंभ करने से पूर्व निम्नलिखित पावन सामग्री एकत्रित कर लें:
- शुद्ध गंगाजल, कच्चा गाय का दूध, पंचामृत एवं स्वच्छ जल
- रोली, कुमकुम, हल्दी, अष्टगंध चंदन एवं अक्षत (अखंडित चावल)
- लाल व पीले पुष्प, कमल गट्टा, दूर्वा, शमी पत्र एवं तुलसी दल
- शुद्ध देशी घी का दीपक, धूपबत्ती, कपूर, सुपारी, लौंग एवं इलायची
- मौसमी फल (केला, सेब, अनार), मिष्ठान्न, खीर एवं पंचमेवा नैवेद्य
- पीला व लाल रेशमी वस्त्र, कलावा (मौली), जनेऊ एवं तांबे का कलश
विजयादशमी की संपूर्ण पूजा विधि (Step-by-Step)
विजयादशमी का पूजन अत्यंत श्रद्धा और शांत चित्त से संपन्न करना चाहिए:
1. प्रातः स्नान एवं शुद्धि
प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त हों। स्वच्छ श्वेत, पीले अथवा लाल वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें।
2. पूजा स्थल की तैयारी व दीप प्रज्वलन
उत्तर या पूर्व दिशा में एक स्वच्छ चौकी (पटरे) पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं। उस पर भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण जी, श्री हनुमान जी एवं माँ दुर्गा का चित्र अथवा प्रतिमा स्थापित करें। शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
3. संकल्प विधि
दाहिने हाथ में जल, अक्षत, पुष्प और दक्षिणा लेकर मन में अपने नाम, गोत्र और मनोकामना का स्मरण करते हुए विजयादशमी पूजन का संकल्प लें।
4. श्री गणेश एवं कुलदेवता पूजन
सर्वप्रथम विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश का स्मरण करें। उन्हें दूर्वा, रोली, चंदन, मोदक और पुष्प अर्पित करें। तत्पश्चात अपने कुलदेवता व इष्टदेव की पूजा करें।
5. श्रीराम, माँ अपराजिता एवं शमी पूजन
भगवान श्रीराम और माता अपराजिता का षोडशोपचार पूजन करें। शमी वृक्ष के समीप जाकर अथवा घर में शमी के पौधे पर जल अर्पित करें, धूप-दीप दिखाएं और शमी स्तोत्र का पाठ करें।
6. शस्त्र, वाहन एवं बहीखाता पूजन
परंपरानुसार इस दिन अपने कार्य में प्रयुक्त होने वाले यंत्रों, कलम, बहीखातों और वाहनों पर स्वास्तिक बनाकर उनका पूजन करें और तिलक लगाएं।
7. भोग व आरती समर्पण
भगवान को ताजे फल और मिष्ठान्न का भोग लगाएं। कर्पूर जलाकर आरती करें और अनजाने में हुई त्रुटियों के लिए हाथ जोड़कर क्षमा याचना करें।
प्रामाणिक सिद्ध वैदिक मंत्र
विजयादशमी के दिन निम्नलिखित सिद्ध मंत्रों का कम से कम 108 बार जप करने से जीवन के समस्त संकट दूर होते हैं:
श्री राम जय राम जय जय राम
धार्मिक एवं पौराणिक महत्व
विजयादशमी केवल बुराई के अंत का दिवस नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कृति की उस सार्वभौमिक सत्यता का उद्घोष है जहाँ अधर्म कितना भी प्रबल क्यों न दिखे, अंततः विजय धर्म और सत्य की ही होती है। भगवान श्रीराम का मर्यादापूर्ण जीवन और माँ दुर्गा का तेज हमें सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
ज्योतिषीय दृष्टि से विजयादशमी का महत्व
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से विजयादशमी के दिन सूर्य और गुरु का विशेष गोचर प्रभाव रहता है। इस दिन साधना, दान और शमी वृक्ष की पूजा करने से जन्म कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या, राहु-केतु दोष और सूर्य की निर्बलता का शमन होता है। विशेषकर जिन जातकों के कार्यों में निरंतर विघ्न आते हैं, उन्हें इस दिन विजय मुहूर्त में संकल्प अवश्य लेना चाहिए।
क्या करें और क्या न करें?
क्या करें?
- प्रातःकाल सूर्योदय के समय सूर्य देव को अर्घ्य दें और माता-पिता के चरण स्पर्श करें।
- शमी वृक्ष का पूजन कर इसके पत्तों को आदरपूर्वक अपने पूजा घर अथवा तिजोरी में रखें।
- अपने व्यावसायिक यंत्रों, पुस्तकों, वाहन और औजारों की सफाई कर उनका पूजन करें।
- निर्धन व्यक्तियों एवं ब्राह्मणों को अन्न, वस्त्र और फल का दान करें।
- पूरे दिन मन में भगवान श्रीराम और माँ दुर्गा का नाम स्मरण करें।
क्या न करें?
- इस पावन दिन घर में किसी भी प्रकार का कलह, क्रोध अथवा अपशब्दों का प्रयोग न करें।
- तामसिक भोजन (मांसाहार, प्याज, लहसुन) और मदिरा का सेवन पूर्णतः वर्जित रखें।
- राहुकाल के अशुभ समय में किसी भी नए कार्य या पूजा का शुभारंभ न करें।
- शमी वृक्ष अथवा किसी भी हरे वृक्ष को क्षति न पहुँचाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
निष्कर्ष
विजयादशमी 2026 का महापर्व आत्मिक शुद्धि, धर्म की रक्षा और नवीन संकल्पों का महापर्व है। इस दिन विधि-विधान से किया गया पूजन और शमी व अपराजिता की आराधना जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और विजयश्री की प्राप्ति कराती है।